



साक्षात सिद्ध शक्तिपीठ माँ चामुण्डा धाम की पावन भूमि पर आपका हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन। माँ चामुण्डा, माँ मङ्गला एवं माँ दुर्गा की कृपा से आपका जीवन सुख, शांति एवं समृद्धि से परिपूर्ण हो।
मिथिला की पावन धरती पर स्थित माँ चामुण्डा धाम श्रद्धा, आस्था एवं दिव्य चमत्कारों का अद्भुत केंद्र है। यहाँ प्रतिदिन भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
मंदिर परिसर में नित्य पूजा, कन्या पूजन, भंडारा, सप्तशती पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है।
माँ चामुण्डा धाम के विकास, सेवा कार्यों एवं धार्मिक आयोजनों को सफल बनाने हेतु अपना सहयोग एवं आशीर्वाद प्रदान करें।
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माँ चामुण्डा के बारे में
जय माँ चामुण्डा जय माँ मंगला जय माँ दुर्गा
।। ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ।।
पावन पचही गाम में चामुण्डा अवतार ।
मिथिला-मैथिल मोद में चामुण्डा जय-जयकार ।।
मिथिला पूरे प्रदेश सहित देश में विभिन्न माह शक्तिपीठों के लिए प्रसिद्ध रहा है। इसी कड़ी में पचही गांव स्थित चामुण्डा स्थान का विशेष स्थान है। श्रद्धा, भक्ति, आस्था एवं समर्पण का प्रतीक है पचही गांव का महा शक्तिपीठ चामुण्डा स्थान। मिथिला में प्रसिद्ध इस महा शक्तिपीठ में मूर्ति नहीं बल्कि समाधि की होती है पूजा। झंझारपुर-मधेपुर (NH527A) मुख्य सड़क किनारे पचही गांव में अवस्थित है यह स्थान।
चामुण्डा स्थान के आसपास का प्राकृतिक दृश्य बड़ा ही मनोरम है। प्रातःकाल सूर्य की लालिमा जब मंदिर की गुम्बद पर पड़ती है तो एक बड़ा ही मनोहारी दृश्य उत्पन्न होता है। इस पवित्र व अलौकिक स्थल में आस्था अर्पित करने श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां की प्राकृतिक-सौंदर्य बरबस ही श्रद्धालुओं को मनमोह लेता है। इस स्थान पर हालांकि सालोभर आस्था निवेदित करने श्रद्धालु पहुंचते हैं। लेकिन, शारदीय एव वासंती नवरात्रा तथा महादेव पूजा के दौरान यहां हजारों कुमारी-कन्याओं को भोजन कराया जाता है। प्रतिवर्ष कोजागरा के बाद यहां पांच दिवसीय महादेव पूजनोत्सव का आयोजन किया जाता है। कहा जाता है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व गांव में यहां अवतरित हुई थीं। नेपाल राष्ट्र सहित बिहार के विभिन्न भागों से श्रद्धालु यहां उपासना करने आते हैं।
चामुण्डा स्थान की चर्चा आध्यात्मिक पुस्तकों में भी उल्लिखित है। पुस्तकों के अनुसार, मुगल शासन काल में जनक नंदिनी सीता की पावन भूमि मिथिला की हिंदुस्थली में अवतरित हुए साधकों में वर्धमान झा उपाध्याय नाम के न्यायशास्त्र के विद्वान पचही गांव में थे। उन्हें चामुण्डा, जयमंगला एवं दुर्गा मां की तीन पुत्रियां थीं। कहा जाता है कि एक दिन तीनों बहनें गांव से दक्षिण बगीचे में फूल चुन रही थीं। उसी वक्त मुगल सेना की टोली उस रास्ते से गुजर रहा था। सेनाओं के पैरोंचित ध्वनि का प्रभाव पड़ते देख बड़ी बहन चामुण्डा ने धरती माता से प्रार्थना की। इसके बाद तत्काल उस स्थल पर धरती फट गई और तीनों बहनें उसमें समा गईं। ग्रामीणों और पिता को मिले स्वप्न के बाद यह स्थान महा शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हो गया। मिथिला दर्पण, मिथिला तीर्थ प्रकाश एवं आध्यात्मिक पत्रिका कल्याण के 1948 के जनवरी अंक सहित करीब डेढ़ दर्जन पुस्तकों में वर्णित तथ्यों के अनुसार वृद्धावस्था में वर्धमान झा उपाध्याय को गंगा स्नान की इच्छा हुई। इसके बाद उन्होंने अपने पुत्री का स्मरण किया। तत्पश्चात इसराईन चौड़ में गंगा अवतरित हुई। चार सौ वर्ष बाद भी आज तक पचही इसराईन चौड़ का पानी नहीं सूखा है। करीब 50 वर्ष पूर्व तो इस महा शक्तिपीठ के प्रांगण में एक अद्भुत घटना घटी। प्रांगण में बरगद का एक पुराना वृक्ष था। ग्रामीणों ने उस वृक्ष को बेचने की योजना बनाई और एक ग्राहक के हाथों बेच दिया। ग्राहक ने इस वृक्ष को काट तो दिया, लेकिन दूसरे दिन जब वह आया तो लकड़ी के बदले पहले की तरह वृक्ष था। वह भागा-भागा ग्रामीणों के पास पहुँचा, ग्रामीणों के माध्यम से यह बात दूर-दूर तक फैली। दूर-दूर के लोग उस वृक्ष को देखने आए। इस बात से लोगों की आस्था तो और दृढ़ हो गई। दरभंगा महाराज स्वर्गीय कामेश्वर सिंह भी यहां आस्था अर्पित करने कई बार पहुंचे थे। ऐसी मान्यता है कि पचही चामुण्डा स्थान में पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
संस्था के पदाधिकारी एवं सदस्य
🙏🚩 जय माँ चामुण्डा ! जय माँ दुर्गा !! जय माँ मङ्गला !!! 🙏🚩
॥ नमश्चण्डिकायै !! नमश्चामुण्डायै !! ॥
🌺 साक्षात्सिद्ध-शक्तिपीठ — माँ चामुण्डा स्थान महात्म्य 🌺
।। श्रीः पातु माम् ।।
ऋद्धि-सिद्धि सहित श्री मन्महागणाधिपतये नमः ।।
🙏 जय माँ चामुण्डा । जय माँ मङ्गला । जय माँ दुर्गा नमो नमः ।।
चामुण्डा गणनाथ रूद्रसहिता रक्षन्तु मां मातरः ।।
जय त्वं देवि चामुण्डे !
जय भूतार्ति हारिणी ।
जय सर्वगते देवि
कालरात्रि नमोस्तुते ।।
दंष्ट्राकरालवदने
शिरोमालाविभूषणे ।
चामुण्डे मुण्डमथने
नारायणि नमोस्तुते ।।
चामुण्डे मङ्गले दुर्गे ईश्वराईनअधिवासिनी ।
सर्वानन्द करे बाले
श्रीमात्रे नमोस्तुते ।। १।।
चामुण्डे मङ्गले दुर्गे,
सर्वाभीष्ट प्रदायिनि ।
भक्तेभ्यो वरदे देवि
बालाम्बिका नमोस्तुते ।। २।।
चामुण्डे मङ्गले दुर्गे,
त्रिपुराद्यै त्रिदैवते ।
भक्तेभ्यो वरदे देवि,
महिषघ्नी नमोस्तुते ।।
चामुण्डे मङ्गले दुर्गे
सर्वकाम प्रदायिनी ।
त्वं देवि जगन्माता,
सर्वानन्द प्रयच्छ मे ।।
🌺 पावन पचही गाम में चामुण्डा अवतार ।।
मिथिला मैथिल मोद में चामुण्डा जय-जयकार ।। 🌺
चामुण्डा-जय मङ्गला, जय दुर्गा अभिराम ।
श्रीमत् उमापति विनत श्यामापति सुकाम ।।
चामुण्डा विकास फाउंडेशन (रजि.) के उद्देश्य
🌺 1. माँ चामुण्डा धाम का विकास
मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण, विस्तार एवं धार्मिक वातावरण का संरक्षण करना।
🙏 2. सनातन संस्कृति का संरक्षण
वैदिक परंपरा, पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान एवं भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देना।
📚 3. धार्मिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा
युवाओं एवं बच्चों को धर्म, संस्कार, शास्त्र एवं नैतिक शिक्षा प्रदान करना।
🍛 4. भंडारा एवं सेवा कार्य
गरीब, जरूरतमंद एवं श्रद्धालुओं के लिए भोजन, प्रसाद एवं सेवा कार्य आयोजित करना।
👧 5. कन्या पूजन एवं सामाजिक सेवा
कन्या पूजन, गौ सेवा, गरीब सहायता एवं समाज कल्याण कार्य करना।
🛕 6. धार्मिक आयोजन
नवरात्रि, दुर्गा पूजा, भागवत कथा, देवी जागरण एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करना।
🌳 7. पर्यावरण एवं स्वच्छता अभियान
मंदिर परिसर एवं आसपास स्वच्छता एवं वृक्षारोपण अभियान चलाना।
🤝 8. समाज में एकता एवं सद्भाव
धर्म, सेवा एवं संस्कृति के माध्यम से समाज में भाईचारा एवं सद्भाव बढ़ाना।
📖 9. धार्मिक पुस्तकालय एवं अध्ययन केंद्र
धार्मिक ग्रंथों, पुस्तकों एवं आध्यात्मिक अध्ययन हेतु पुस्तकालय की स्थापना करना।
🩺 10. जनकल्याण कार्य
गरीबों हेतु चिकित्सा शिविर, वस्त्र वितरण एवं सहायता कार्यक्रम चलाना।
🚩 संकल्प 🚩
“माँ चामुण्डा का विकास, संस्कृति का संरक्षण एवं सेवा ही हमारा धर्म है।”
संगठन के सदस्य
प्रबंधन समिति
हमारी प्रबंधन समिति के सम्मानित सदस्यों से परिचित हों, जो संस्था के उद्देश्य, सेवा कार्यों एवं मिशन का नेतृत्व एवं सहयोग कर रहे हैं।
सामान्य सदस्य
हमारे समर्पित सदस्यों से परिचित हों, जो संस्था की विभिन्न पहल एवं सेवा कार्यों को मजबूत बनाने के साथ-साथ संगठन की प्रगति एवं सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
सेवा एवं सहयोग
🙏 मंदिर निर्माण हेतु सहयोग करें
आपका छोटा सा सहयोग माँ चामुण्डा धाम के विकास एवं मंदिर निर्माण कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
🌺 धर्म एवं सेवा कार्यों में सहभागी बनें
भंडारा, कन्या पूजन एवं धार्मिक आयोजनों को सफल बनाने हेतु अपना सहयोग प्रदान करें।
📚 संस्कृति एवं शिक्षा संरक्षण हेतु दान करें
सनातन संस्कृति, धार्मिक शिक्षा एवं संस्कारों के प्रसार में अपना अमूल्य योगदान दें।
🤝 जनकल्याण कार्यों में सहयोग करें
गरीब सहायता, चिकित्सा शिविर एवं सामाजिक सेवा कार्यों के लिए दान देकर पुण्य के भागी बनें।





